Male Molestation : पुरुष भी होते हैं छेड़खानी का शिकार और ये विदेश में नहीं, भारत में भी होता है

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वो पुरुष हैं इसीलिये पूरी तरह सुरक्षित हों ये ज़रूरी तो नहीं,
नारी, नारी है इसीलिये पूरी तरह निर्दोष हो ये ज़रूरी तो नही.

ये कहानी शुरू होती है भोपाल से, जब एक बार बस से सफ़र के दौरान मैंने एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति को 14-15 साल के लड़के के Private Part पर हाथ डालते देखा. समझ में नहीं आया कि क्या करना चाहिए, उस लड़के के चेहरे पर वही भाव थे, जो कई बार मेरे चेहरे पर भी उभर आते हैं, जब कोई ‘उस तरह से’ छूने की कोशिश करता है. हिन्दुस्तान में ज़्यादातर लड़कियां और कुछ सीखें या ना सीखें, पर ताकती नज़रों और छूने के बहाने ढूंढने वाले हाथों के साथ जीना सीख ही जाती हैं. पर किसी लड़के के साथ ऐसा होते मैंने पहली बार देखा था. इस बात का मलाल तो हमेशा ही रहेगा कि उस बच्चे की मदद नहीं कर पाई.

ये घटना एक बहुत बड़ा Turning Point था. उस दिन मैंने अपनी आंखों से देख लिया कि पुरुष भी Molestation का शिकार होते हैं. जिस समाज में स्त्री को कमज़ोर समझा जाता है, रेप या छेड़खानी का ज़िम्मेदार उसी के चाल-चलन और कपड़ों को ठहरा दिया जाता है, ऐसे समाज के लोग इस बात को कभी हज़म नहीं कर सकते कि पुरुष भी छेड़खानी का शिकार हो सकते हैं.

Male Molestation पर उतनी बात नहीं होती जितनी होनी चाहिए. इसके दो कारण हैं, पहला लोग ये मानने को तैयार नहीं होते कि पुरुषों के साथ भी ऐसा होता है दूसरा पुरुष ख़ुद भी इस पर बात करने से कतराते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि लोग उन्हें Judge करने लगेंगे. सच भी यही है कि लोग इसे पुरुषों की Machismo यानि कि मर्दानगी से जोड़कर देखने लगते हैं.

फ़िल्में समाज का आईना होती हैं, ऐसा किताबों में लिखा गया है. कुछ फ़िल्मकार ये सोचकर ही फ़िल्में बनाते हैं. पर इस गंभीर विषय को Mainstream Cinema में भी जगह नहीं मिली. फ़िल्म बद्रीनाथ की दुल्हनिया में इस विषय को कुछ मिनटों के लिए जगह दी गई. पर इस फ़िल्म में Male Molestation को एक Funny Scene की तरह दिखाया गया. कुछ लोग हीरो ‘बद्री’ के साथ छेड़कानी करते हैं और हीरोइन ‘वैदेही’ उसे बचाती है और अपना दुपट्टा देती है और सभी हंसने लगते हैं. यहां इतने गंभीर विषय को इतने मज़ाकिया ढंग से पेश किया जाना सरासर ग़लत था और इसकी जितनी निंदा की जाए कम है.
इस सिलसिले में जब मैंने कुछ लोगों से बात करने की कोशिश की, तो कुछ लोगों ने तो इस गंभीर समस्या को हंसी में उड़ा दिया, कुछ लोगों ने मुझे पागल करार दिया, तो कुछ लोगों ने इस पूरे So-Called Concept को ही आंखों का धोखा और एक Imagination बता दिया.

ये Human Nature है, हम बुरी यादों को भूला देना चाहते हैं. लेकिन हम ये भुल जाते हैं कि जब तक समस्या पर बात नहीं होगी, समस्या का समाधान भी नहीं मिलेगा. बहुत ज़्यादा खोज-बीन करने के बाद मुझे कुछ ऐसे लोग मिले, जो इस मामले में खुलकर बात करने को तैयार हो गए. अगर हो सके तो उनके दर्द को समझने की कोशिश कीजियेगा.
उसने Lift मांगी थी और फिर मुझे कस के पकड़ लिया था

मुझे उस रात ऑफ़िस से लौटने में देर हो गई थी, मैं जल्द से जल्द घर पहुंचना चाहता था. ऑफ़िस से थोड़ी ही दूरी पर एक 20-22 साल की लड़की ने मुझे इशारे से रुकने को कहा. मैं बगल में खड़ी गाड़ी देखकर समझ गया कि उसकी गाड़ी ख़राब हो गई थी. मैंने अपनी बाइक रोक दी और उससे पूछा कि उसे कहां जाना है. उसने कहा कि थोड़ा आगे जाकर ही उसका घर है. आमतौर पर अनजानी लड़कियां ज़रा अलग होकर बैठती हैं, पर वो मुझ से सट कर बैठ गई. मुझे अजीब लगा इसीलिये मैं थोड़ा आगे हो गया. रास्ता ख़राब था इसीलिये उसने अपने हाथ मेरी कमर पर रख दिये थे. मुझे अच्छा नहीं लग रहा था, पर मुसीबत भी तो मैंने ही मोल ली थी. मुश्किल से 6-7 मिनट हुए थे उसको बैठे हुए और उसने मेरे Private Part पर अपना हाथ रख दिया.

सच कहूं मैं बहुत डर गया था, क्योंकि ऐसा मेरे साथ कभी नहीं हुआ था. एक लड़की अगर ऐसा करे तो आमतौर पर लड़के इसे मौके की तरह देखते हैं, पर मुझे बहुत गंदा लगा. मैंने बाइक रोकी और उसे डांटकर उतरने को कहा. मैं क़िस्मतवाला था कि उसने मुझे सिर्फ़ Middle Finger दिखाई और उतर गई. मैंने अपनी बाइक की रफ़्तार बढ़ाई और जैसे-तैसे घर पहुंचा. इस घटना के कई दिनों बाद तक मैं किसी को भी Lift देने की हिम्मत नहीं कर पाया. किसी अनजान लड़की के सामने आज भी असहज महसूस करता हूं.

मेरी बॉस ने मुझे अपने घर पर बुलाकर, ग़लत ढंग से Touch किया था, मैंने Resign दे दिया
मेरी नई जॉब थी, Join किये हुए मुझे सिर्फ़ 10 दिन हुए थे. तब तक मैंने पूरा ऑफ़िस तक नहीं देखा था. मेरी बॉस ने मुझे अपने घर ये कहकर Invite किया कि मेरे लिए Employees ने मिलकर Surprise पार्टी रखी है. मैं जब उनके घर गया तो वहां कोई नहीं था. उन्होंने कहा कि मेरे लिए यही Surprise था. मैंने ज़रा सा असहज महसूस किया. पर मेरे पास घर वापस जाने का कोई कारण नहीं था. उन्होंने मुझे ड्रिंक्स ऑफ़र की, मैं सोफ़े पर बैठ गया. वो भी अपना ग्लास लेकर बैठ गई, सोफ़ा बड़ा था फिर भी वो मेरे से सटकर बैठ गई. मुझे बहुत अजीब लगा. पर मैं चुपचाप बैठा रहा. पीते-पीते उसने मेरी Thigh पर हाथ रख दिये और उसे सहलाने लगी. ये बहुत ही अजीब था मैंने उसका हाथ हटाया तो उसने मुझे घूरकर देखा, मैं वहां से तेज़ी से भागा और घर जाकर ही दम लिया. लैपटॉप ऑन करके मैंने अपना Resignation HR को भेज दिया.

अकाउंट्स की कोचिंग में पास बैठी लड़की ने मुझे ग़लत ढंग से छुआ, मैंने उस क्लास में जाना छोड़ दिया
अकसर Molestation का शिकार हुआ हूं. मुझे पता है कि लड़कियां कैसा Feel करती हैं. अकाउंट्स की कोचिंग की क्लास थी. उस कोचिंग में सैकड़ों बच्चे थे, तो ज़ाहिर सी बात है कि 1-2 लड़कों को छोड़कर किसी से उतनी दोस्ती नहीं थी. उस दिन कोचिंग के Break में मेरे दोस्त ने बताया था कि एक लड़की मुझे पसंद करती है और मेरी वजह से वो सुबह से रो रही है, मुझे समझ नहीं आया कि मुझे क्या करना चाहिए. मेरे दोस्त ने ही कहा कि मुझे उसके पास जाकर बैठना चाहिए. मैं Break ख़त्म होने के बाद उसके पास जाकर बैठ गया, मुझे अजीब लग रहा था क्योंकि वो मेरी वजह से रो रही थी. पर मैं जैसे ही उसके पास बैठा वो Normal हो गई, न तो वो रो रही थी और न ही दुखी नज़र आ रही थी. इतना ही नहीं, वो खिलखिलाकर मुझ से बातें करने लगी. उसने ज़बरदस्ती अपना फ़ोन नंबर मेरी नोटबुक पर लिख दिया. यहां तक तो फिर भी सब ठीक था. पर फिर उसने मेरे हाथ पर अपना हाथ रख दिया और मुझ से सटकर बैठने लगी. मुझे उसकी ये हरकत जितनी अजीब लगी, उसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है.

इस घटना का ज़िक्र मैंने जब भी किसी के सामने किया है, ज़्यादातर लोग मुझे बेवकूफ़ कहकर निकल जाते हैं. क्योंकि मैंने एक ‘मौका’ छोड़ दिया था. क्या करूं मुझे लड़कियां मौका नहीं इंसान लगती हैं.

मंदिर के पंडित जी ने मंदिर में ही मेरे साथ ज़बरदस्ती करने की कोशिश की
सुनने में अजीब लगता है, पर मुझे अच्छे से याद है मैं 12वीं कक्षा में पढ़ता था और मां के साथ मंदिर गया था. मां पूजा में व्यस्त थीं और मैं इधर-उधर घूम रहा था. तभी पीछे से आकर किसी ने मुझे कसकर पकड़ लिया. उसका Private Part मेरे Hips पर था. मैंने गर्दन घुमाकर देखा, तो वो मंदिर के ही पुजारी थे और मुस्कुरा रहे थे. मैं ख़ुद को जैसे तैसे छुड़ाकर भाग गया. मैंने ये घटना अपनी मां से भी नहीं कही.

ऐसे ना जाने कितने ही पुरुष हैं जो हर रोज़ ऐसी घटनाओं का शिकार होते हैं और चुपचाप रह जाते हैं, क्योंकि वो जानते हैं कि कोई भी उनकी बात का यक़ीन नहीं करेगा. अगर किसी पुरुष के साथ रेप भी हो जाए तो इससे जुड़ा एक भी क़ानून, हमारे देश में नहीं है. हमारे समाज ने तो यही मान लिया है कि स्त्रियां कभी ग़लत हो ही नहीं सकती. देश के क़ानून की तरफ़ भी देखें तो ज़्यादातर क़ानून स्त्रियों के ही पक्ष में है. Molestation के बारे में Victims को खुलकर बात करनी चाहिए. इसमें झिझक, शर्म महसूस हो, तो ऐसे लोगों से बातें करें जिन पर आप सबसे ज़्यादा भरोसा करते हैं. अगर आप भी कभी ऐसी घटना का शिकार हुए हैं, तो सबसे पहले ये सोच अपने दिमाग़ से निकालें, कि इस पर बात करने से आपकी मर्दानगी कम हो जाएगी. न्यूज सोर्स – गजब पोस्ट

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