पेरिस सिंड्रोम: एक ऐसी मानसिक बीमारी जहां पेरिस की खूबसूरती ही बन जाती है लोगों के लिए मुसीबत

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पेरिस को प्यार का शहर कहा जाता है. अपनी खूबसूरत लोकेशंस और शानदार कल्चर के लिए मशहूर फ्रांस का ये शहर दुनिया भर के लव बर्ड्स के लिए किसी जन्नत से कम नहीं. लोग इस शहर के किस्से पढ़ते हैं, फ़िल्मों से इस शहर की खूबसूरती से रू-ब-रू होते हैं और ज़ाहिर है ये कई लोगों के लिए एक आम शहर न होकर एक सपनों का शहर बन जाता है.
कई ऐसे लोग जो पेरिस से बेतहाशा उम्मीदें लगा बैठते हैं, इस जगह को रोमैंटिसाइज़ करने लगते हैं, वे उम्मीदें पूरी न होने पर एक अजीबोगरीब समस्या का शिकार हो सकते हैं, जिसे पेरिस सिंड्रोम का नाम दिया गया है. ये एक बेहद दुर्लभ मानसिक प्रतिक्रिया है.

ज़ाहिर है इस समस्या को अभी तक पेरिस आने वाले पर्यटकों में ही देखा गया है. ये सिंड्रोम ज़्यादातर जापानी पर्यटकों में देखने को मिला है. इसमें दिल की धड़कने तेज़ होना, पसीने छूटना, बैचेनी, वास्तविकता से अलग अपनी दुनिया में रहने का भ्रम और Hallucinations इसके Symptoms हो सकते हैं.
फ़्रांस में रहने वाले जापानी मनोरोग चिकित्सक हीरोआकी ओटा के मुताबिक, ‘1988 से लेकर 2004 तक 63 जापानी लोग पेरिस सिंड्रोम का शिकार थे. थकावट और अत्यधिक यात्रा की वजह से होने वाला तनाव इसमें अहम भूमिका निभाता है. कल्चर तौर पर अलग पर्यावरण भी पर्यटकों को अजीब और अकेला महसूस करवा सकता है’.
साफ़ है कि लंबी यात्राएं करने वाले और दूसरे कल्चर में ठीक से कंफ़र्टेबल न हो पाने वाले लोगों को पेरिस सिंड्रोम होने की संभावना हो सकती है.

गौरतलब है कि जापान और फ्रांस का कल्चर बेहद अलग है और ऐसी कई रिपोर्ट्स सामने आ चुकी हैं जिसके अनुसार, कुछ लोगों के लिए ऐसे किसी देश में रहना बेहद मुश्किल होता है, जहां उन्हें ‘कल्चर शॉक’ लगने की उम्मीद ज़्यादा होती है. शायद यही कारण है कि इस सिंड्रोम के सबसे ज़्यादा शिकार जापानी लोग ही होते हैं.
तो अगर आप भी पेरिस जाने का प्लान बना रहे हैं तो इस शहर पर अपनी उम्मीदों का भार न लाद दें. किसी और शहर की तरह ही यहां भी इस जगह की खूबसूरती एंजॉय करेंगे तो आपके लिए ही अच्छा होगा.

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